ये तीन नस्ल की भेड़ पालने से पशुपालक हो जाएंगे मालामाल, कम लागत में लाखों रुपए की कमाई, जानिए कैसे

Sheep Farming in India: हमारे देश में करोड़ों की शान गाय पालन और बकरी पालन की तरह अब भेड़ पालन करके अपना जीवन यापन कर रहे हैं। भेड़ पालन में आप बहुत ही कम निवेश करके अच्छा खासा मुनाफा प्राप्त कर सकते हैं। इसका इस्तेमाल दूध, चमड़ा, ऊन और मांस उत्पादन के लिए किया जाता है। जिससे किसान भाई लाखों की कमाई कर सकते हैं।

हमारे देश में ऐसे बहुत सारे राज्य हैं जहां भेड़ पालन के लिए कई प्रकार के योजनाएं चलाई जा रही है और सभी किसान इसका लाभ लेकर अपनी कमाई बढ़ा रहे हैं। तो दोस्तों हम आपको भेड़ के तीन ऐसे नस्ल के बारे में बताने वाले हैं जिन्हें आप पालकर अच्छी खासी कमाई कर सकते हैं। तो दोस्तों आप हमारे इस पोस्ट को शुरू से अंत तक ध्यान पूर्वक जरूर पढ़ें।

भेड़ पालन ग्रामीण क्षेत्रों के लिए बेहद फायदेमंद होगा

भेड़ पालन ग्रामीण इलाकों में किसानों के लिए बहुत ही फायदेमंद व्यवसाय बन गया है भारत में फिर हाल मेरिनो, कोरीडायल रामबुतू, छोटा नागपुरी, शहाबाबाद, मालपुरा, जैसलमेरी, मंडिया, बीकानेरी प्रजाति के पेड़ों के पालने का चलन ज्यादा है।

किसानों के लिए बेहद जरूरी है पेड़ों की नस्लों का चुनाव करना

अक्सर हम देखते हैं कि कई ऐसे किसान भाई होते हैं जो हमेशा शिकायत करते हैं कि भेड़ पालन से हमें अच्छी खासी कमाई नहीं हो रही है तो हम उन्हें बता दे कि भेड़ पालन के लिए सही भेड़ों की नस्लों का चुनाव करना बहुत ज्यादा जरूरी है। आज हम आपको भेड़ों की कुछ प्रमुख नस्ल के बारे में बताने जा रहे हैं जिससे पशुपालक ज्यादा से ज्यादा मुनाफा प्राप्त कर सकते हैं।

अविवस्त्र नस्ल की भेड़

यह भेड़ राजस्थान की चकला नस्ल की भेड़ और मेरिनो के वर्ण संकरण से विकसित किया गया है इस भेड़ से 3 से 4 किलोग्राम उन प्राप्त कर सकते हैं। इस भेड़ का वजन 6 माह की उम्र में 12 किलो और 1 वर्ष की उम्र में 23 किलो तक पहुंच जाता है।

मेरिनो नस्ल की भेड़

भारत में इस नस्ल की भेड़ बड़े पैमाने पर पाली जाती है। यह भेड़ मुख्य रूप से स्पेन की है यह भेड़ विपरीत जलवायु में जीवन यापन करते हैं। इस नस्ल की भेड़ अधिक उत्पादन के लिए सबसे बेहतर मानी जाती है। मादा भेड़ों में सिंह नहीं होते हैं वही नर भेंड़ में घुमावदार सिंग होती है। इस नस्ल के भेड़ से 5 से 9 किलोग्राम उन प्राप्त किया जा सकता है।

चौकला नस्ल की भेड़

यह भेड़ राजस्थान के झुंझुनू, चूरू और सीकर जिले में बड़े पैमाने में पाली जाती है। सफेद रंग के इस भेड़ के चेहरे का रंग गोरा और काला होता है। इस नस्ल की नर का वजन 30 से 40 किलोग्राम और मादा का वजन 22 से 32 किलोग्राम होता है। इस नस्ल की भेड़ से हर साल 2 से ढाई किलोग्राम उन प्राप्त किया जा सकता है।

निष्कर्ष

दोस्तों आज के इस पोस्ट में हमने आपको भेड़ के तीन नस्ल के बारे में पूरी जानकारी देने की कोशिश की है अगर आपको यह जानकारी अच्छी लगी हो तो अपने दोस्तों और फैमिली के साथ शेयर जरूर करें। तो दोस्तों आज के लिए बस इतना ही मिलते हैं अगले पोस्ट पर तब तक के लिए Lot’s of love Jharna Chaudhary

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